Saturday, 9 May 2020

ग़ैर पर

जब मुक़द्दर ख़ुद बनाता और मिटाता है बशर,
किसलिये करता है चीमा गोईयां फिर ग़ैर पर..
उर्मिला माधव..
9.5.2016

पसंद हैं

दुनियां के लोग कितने ...ख़ुशामद पसंद हैं,
दानिशवरों की सफ़ में खड़े हो गए फ़िज़ूल....
उर्मिला माधव,
9.5.2017
दानिश्वर --- अक़्लमंद

आदत बनी रही

बेहतर रहा ...के साथ हर इक छूटता रहा,
मुझको अकेले चलने की आदत बनी रही...👍😊
9.5.2017

उम्र भर

बोले के साथ मैं भी नहीं दूंगा उम्र भर,
मैंने अकेले चल के उन्हें दूर कर दिया...
उर्मिला माधव..

ज़िन्दगी है ये

ख़ुद को रखना होश में के ज़िन्दगी है ये,
क्यूं मिज़ाज-ए-इश्क़ रख्खें ख़ुदकुशी है ये..
उर्मिला माधव..
9.5.2017

दहर में

जिनकी कोई ताब ला सकता नहीं,
ऐसी कुछ वीरानियाँ हैं दह्र में,
ग़मज़दा दिल उसमें जब हो मुब्तिला,
मुझको सब आसानियां हैं दह्र में..
उर्मिला माधव

Tuesday, 5 May 2020

बुज़ुर्ग

वो जो घुटनों पै दौड़ जाते थे,
अपने पैरों से चल न पाते हैं,
जो कभी सबका भार ढोते थे,
आज वो ख़ुद संभल न पाते हैं.
.Urmila Madhav
5.5.2013

Friday, 1 May 2020

खीसे में अपने

आप जो भी हों, रहें खीसे में अपने,
हम तआल्लुक़ की मशीनें देखते हैं,
उर्मिला माधव
2.5.2019