Wednesday, 29 November 2023

ज़ख़्म

ये ऐसे ज़ख़्म हैं जिनका कोई बदल ही नहीं,
किसीका यूं ही बिछड़ जाना फिर नहीं आना
उर्मिला माधव

Thursday, 2 November 2023

आना-जाना आपका

याद हमको आ गया वो मुस्कुराना आपका,
और बिना चाहे भी जब-तब हक़ जताना आपका,
गाहे-गाहे आपकी भी दास्तां सुनते थे हम,
जब हुआ करता था हरदम, आना-जाना आपका,
उर्मिला माधव