ये मेरे शेर और क़तआत ---
Friday, 18 August 2023
धड़कनें चीखीं
हम हुए ख़ामोश तो फिर धड़कनें चीखीं बहुत,
हम कलेजा थाम कर, कब तक खड़े रहते वहां..
उर्मिला माधव
Thursday, 17 August 2023
जो क़ाफ़िए और बह्र को
जो क़ाफ़िए और बह्र को रोते हैं रात दिन,
वो जानते कहाँ हैं, किसी बदहवास को,
जीते हैं अपने तौर पे, हम अब भी आज भी,
हम जानते कहाँ हैं, किसी ग़मशनास को...
उर्मिला माधव
काट दी
जो क़ाफ़िए और बह्र को रोते हैं रात दिन,
वो जानते कहाँ हैं, किसी बदहवास को,
जीते हैं अपने तौर पे, हम अब भी आज भी,
हम जानते कहाँ हैं, किसी ग़मशनास को...
उर्मिला माधव
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