Sunday, 18 September 2022

ज़िन्दगी बेज़ार है

ज़िन्दगी के चार लम्हे बेशक़ीमत थे कभी,
अब उन्हीं लम्हों से मिलकर ज़िन्दगी बेज़ार है...
उर्मिला माधव

Friday, 16 September 2022

बरसात

हमारे शह्र में बरसात काफ़ी हो रही है,
किसीकी याद में वादे सबा ही रो रही है
यहीं मेरा नशेमन है, यहीं बिजली गिरी है
यही ताज़ा ख़बर है, जो रही है सो रही है
उर्मिला माधव