ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 30 August 2022
महदूद
हमको अपने दायरे महदूद रखना ठीक था,
'जो' भी हमको रब दिखाना चाहता 'वो' देखते।।
उर्मिला माधव
Wednesday, 24 August 2022
तो?
कोई पैदा हो कोई मर जाए, तो?
हादसों से ज़िन्दगी डर जाए, तो?
मुश्किलों को किस तरह अंजाम दूँ?
कुल जहां का ग़म मिरे सर जाए तो?
उर्मिला माधव
Monday, 22 August 2022
दिल मिरा रोज़
दिल मिरा रोज़ तुझे छू के गुज़र जाता था,
फिर भी कमज़ोर मुझे कोई अदा कर न सकी
उर्मिला माधव
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