Tuesday, 31 May 2022

रफ़्ता-रफ़्ता

रफ़्ता-रफ़्ता हम जहां से दूर बिल्कुल हो गए,
हर कोई समझा कि हम मग़रूर बिल्कुल हो गए,

हर नफ़स दुनियां में जब देखा ज़वाल ए रौशनी
फ़ैसला लेने को तब मजबूर बिल्कुल हो गए..
उर्मिला माधव
31 मई 2022

Sunday, 29 May 2022

सबकी ग़ैरत

सबकी ग़ैरत सो गई है......क्या करूँ ?
रूह तक जब रो गई है......क्या करूँ?
दिल नहीं गिनता है अब ऐब-ओ-हुनर,
ज़िद सी इसको हो गई है....क्या करूँ?
उर्मिला माधव....
30.5.2016

Sunday, 1 May 2022

आपा खो दिया

आपकी सांसों की हमने उम्र भर रख्खी ख़बर,
इस मशक्कत में ही हमने अपना आपा खो दिया
उर्मिला माधव