Friday, 11 February 2022

हाय दैया

एक मतला तीन शेर,
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कितनी सारी गहमा-गहमी हाय दैय्या,
दुनिया कैसी सहमी-सहमी हाय दैय्या,

प्यार कहाँ पर मिलता है,इस मेले में,
सबकी आँखों में बे-रहमी हाय दैय्या,

जब हमने पहचाना,सबको ठीक नहीं,
क्यूँ हम पालें ये ख़ुशफ़हमी,हाय दैय्या,

क्या पहचान बताऊँ सबको दुनिया की,
सबकी आँखें लगती बहमी,हाय दैय्या,
उर्मिला माधव...
12.2.2014....

ग़म रहेगा

उंसियत मुझको कोई दरकार कब है,
हां मगर जो ग़म है, वो तो ग़म रहेगा,
उर्मिला माधव

बसेरा हो गया

शबनमी अश्कों का पलकों पर बसेरा हो गया,
कुछ ज़ियादा बोझ था, दिन बिन ढले ही सो गया,
उर्मिला माधव