Friday, 18 August 2017

आओ बे वक़्त ही मरने का इरादा करलें,
सोचते हैं के यहीं उम्र को आधा करलें,
तुमने जो हाथ बढ़ाया है यहीं रुक जाओ,
फिर न बिछड़ेंगे कभी आज ये वादा करलें,
उर्मिला माधव,
12 .8 .2017
दिल बड़ा रखते थे,तेरे दर पे आ जाते थे हम,
अब हमें मंज़ूर हैं ता उम्र ये तनहाइयाँ…
उर्मिला माधव..
मेरी मजबूरियां हैं अब,कहाँ आऊँ बिहारी मैं 
तुझे आना पड़ेगा ख़ुद..मेरी सूनी अटारी में,
उर्मिला माधव।
15 .8 .2017
ज़माना और था वो जब तुम्हें हम याद करते थे ,
जुदा हम हो न जाएँ बस यही फ़रियाद करते थे...
तुम्हारी याद तो अब भी चली आती है रह-रह के
तरस आता है हम खुद को कहाँ बर्बाद करते थे...
उर्मिला माधव...
16.8.2014....
ये भाई बहन की बात नहीं ये रिश्ता तो कुछ ऐसा है ,
नहीं ज़र ज़मीन इसके आगे न इसके बराबर पैसा है ,
इतिहास अभी तक जिंदा है,हर वक़्त गवाही देता है ,
हैं कर्णावती हज़ारों पर,....क्या भाई हुमायूं जैसा है ??
उर्मिला माधव ..
16.8.2017
दिल्लगी जुगनू की सब करते रहे ,
पर कोई ख़ुर्शीद सा था भी कहाँ
उर्मिला माधव,
16.8.2017