ये मेरे शेर और क़तआत ---
Tuesday, 18 April 2023
कर डालीं
हमने खुशियां तमाम कर डालीं,
मुश्किलें अपने नाम कर डालीं,
ज़िन्दगी तेरा ग़म चुकाने को,
अपनी सांसें हराम कर डालीं
उर्मिला माधव
Monday, 10 April 2023
kashish
दुर ए दिंदान और आंखें नशीली,
इस कशिश का कोई क्या सानी रहेगा?
उर्मिला माधव
मंहगी पड़ी है
ज़िन्दगी मुझको बहुत मंहगी पड़ी है,
पर ग़मों की दास्तां पीछे रखी है।
कोई भी तन्हाई में जीने कहाँ दे,
दह्र में हर रोज़ ही रस्सा कशी है।
उर्मिला माधव
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