ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 28 January 2021
मज़बूत संग से
हमको समझ रहे हो महज़ अपने ढंग से,
सर फोड़ने को आए हो मज़बूत संग से
हम आदमी तो आम हैं पर ख़ास बात ये,
जीते रहे हैं ज़िन्दगी बस अपने रंग से
Sunday, 17 January 2021
मेला हो गया है
यूं ज़माना एक मेला हो गया है,
हर कोई घर में अकेला हो गया है.
उर्मिला माधव
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