ये मेरे शेर और क़तआत ---
Thursday, 26 November 2020
भूल करते हैं
हम जो रह-रहके भूल करते हैं,
अपनी इज्ज़त को धूल करते हैं,
जब नुमाइश ग़मों की होती हैं,
ज़िन्दगी बस फ़िज़ूल करते हैं,
उर्मिला माधव...
२६.११.२०१३..
देख भाल के
dil ke muamle hain,zaraa dekh bhaal ke,
rrakh denge log aapki izzat uchhaal ke,
उर्मिला माधव
सब्र गया
हुजूम-ए-रंज की इफ़रात हुई सब्र गया,
सब्र जब टूट गया ख़्वाब तहे क़ब्र गया,
उर्मिला माधव
26.11.2016
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