Sunday, 23 August 2020

हां मैं पत्थर हूँ

हाँ मैं पत्थर हूँ मुझे तुम तोड़ डालो,
खूब तबियत से मेरी किरचें उछालो,
जब जहाँ चाहे मेरे टुकड़े लगा कर,
तुम दरो दीवार की इज्ज़त बचालो.....
उर्मिला माधव....
24.8.2015

रोते थोड़ी हैं

हम जैसे,दुनियां में....रोते थोड़ी हैं,
सोते से दिखते हैं.....सोते थोड़ी हैं 
झुकने से भी पहले देखें..ऊपर को,
मर सकते हैं इज़्ज़त खोते थोड़ी हैं,
उर्मिला माधव।।